Saturday, June 13

रीवा। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संजयगांधी अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने पहली बार एक बड़ा प्रोसीजर सफलतापूर्वक पूरा किया है। विंध्य क्षेत्र के लोगों को पेट संबंधी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं, जिसके चलते मेडिकल कॉलेज में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी नाम का नया विभाग खोला गया है। अस्पताल में उपचार के लिए आए पांच वर्षीय बालक की बड़ी आंत में मौजूद पॉलीप (गांठ) का सफल एंडोस्कोपिक उपचार किया है।

यह प्रक्रिया बिना किसी ऑपरेशन के पूरी की गई। गत माह ही कई आधुनिक मशीनें विभाग में आई हैं, जिसके चलते सरकारी अस्पताल में पेट संबंधी कई बड़ी जांचें रीवा में शुरू हुई हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. एमएच उस्मानी एवं सह-प्राध्यापक डॉ. पी. निगम की टीम ने गंभीर रक्तस्त्राव से पीडि़त बालक का उपचार नवीन इलेक्ट्रोसर्जिकल यूनिट और अत्याधुनिक एंडोस्कोपी उपकरणों की सहायता से किया।

सफल स्नेयर पॉलीपेक्टॉमी के बाद संभावित रक्तस्त्राव को रोकने के लिए हीमोक्लिप्स लगाए गए, जिससे मरीज को ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ी। रीवा सहित पूरे ङ्क्षवध्य क्षेत्र में इस तरह की सुविधाएं अभी तक उपलब्ध नहीं थी। सरकारी अस्पताल में सुविधा प्रारंभ होने से आयुष्मान योजना के जरिए उपचार भी मिलना शुरू हो गया है। अब तक रीवा एवं आसपास के लोग दूसरे शहरों में पेट से जुड़ी इन समस्याओं के लिए बाहर जाते रहे हैं।

बताया गया है कि विभाग की स्थापना के बाद दो माह से कम समय में 160 से अधिक एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं संपन्न की जा चुकी हैं तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रक्तस्त्राव के कई गंभीर मामलों में सफल उपचार किया गया है। कुछ दिन पहले ही उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने विभाग की सुविधाओं का निरीक्षण किया था और बेहतर उपचार सुविधा देने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी नहीं होने देंगे।


महिला की पित्तनली का भी उपचार
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग ने एक अन्य जटिल मामले में 31 वर्षीय महिला का भी सफल उपचार किया। महिला के पित्तनली में फंसी पथरियों और लंबे समय से मौजूद बिलियरी स्टेंट को थेराप्यूटिक ईआरसीपी प्रक्रिया के माध्यम से सुरक्षित रूप से निकालकर पित्तनली को पूरी तरह साफ किया गया। बताया जा रहा है कि इस तरह की सुविधा रीवा में पहली बार शुरू हुई है।
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कई प्रमुख बीमारियों का उपचार रीवा में शुरू
मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. एमएच उस्मानी ने बताया कि विभाग एंडोहेपेटोलॉजी, आईबीडी, क्रॉनिक डायरिया, डिस्फेजिया, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर और अन्य जटिल रोगों के निदान एवं उपचार में भी अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि विभागीय चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, एनेस्थीसिया टीम में उत्साह है, क्योंकि रीवा में पहली बार इस तरह की सेवाएं शुरू की गई हैं।

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