Friday, July 24

jantar-mantar-chhatra-andolan :  दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को देशभर से समर्थन मिल रहा है। कोई स्वयं जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन में शामिल हो रहा है, तो कई लोग दूर रहकर भी छात्रों के लिए खाने-पीने की सामग्री और अन्य आवश्यक सामान भेजकर अपना सहयोग दे रहे हैं।

इसी क्रम में मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के कांग्रेस नेता एवं समाजसेवी विपिन त्रिपाठी ने छात्रों के समर्थन में करीब 17 हजार रुपये की खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई है। उन्होंने लगभग 14 हजार रुपये के पिज्जा के साथ दाल-चावल, पानी की बोतलें और अन्य खाद्य सामग्री छात्रों के लिए ऑनलाइन ऑर्डर करवाई।

विपिन त्रिपाठी ने कहा कि छात्रों की आवाज को मजबूती देने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा, “चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, हम हर समय छात्रों के समर्थन में हैं और रहेंगे। छात्र हित के लिए जो भी आवश्यक होगा, उसे करने के लिए हम हमेशा तैयार हैं।” छात्र आंदोलन को विभिन्न राज्यों से मिल रहे इस तरह के सहयोग को आंदोलनकारियों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला माना जा रहा है। दूर-दराज के लोग भी अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सामग्री भेजकर छात्रों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त कर रहे हैं।

मऊगंज के अनिल की तस्वीरें आंदोलन का बनीं आकर्षण

रीवा और मऊगंज से बड़ी संख्या में छात्र एवं उनके अभिभावक दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे हैं। इन्हीं में मऊगंज जिले की नईगढ़ी तहसील के भीर (मझगवां) गांव निवासी अनिल सिंह भी शामिल हैं। अनिल उस समय चर्चा में आ गए जब पुलिस लाठीचार्ज के दौरान उनके सिर पर चोट लगी और उनका पूरा शरीर खून से लथपथ हो गया। इसके बावजूद वह डटे रहे और लगातार नारे लगाते रहे। उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा, “हम शहीद हैं, हर युग में जन्म लेंगे और इसी तरह आवाज बुलंद करेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजों के समय भी अपने ही देश के सैनिक जनता पर अत्याचार करते थे और आज भी छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। अनिल सिंह का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसे करोड़ों लोग देख चुके हैं। आंदोलन में वह प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए हैं।

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रिटायर्ड शिक्षक मुद्रिका प्रसाद दे रहे समरसता का संदेश

मऊगंज के रिटायर्ड शिक्षक मुद्रिका प्रसाद त्रिपाठी भी छात्रों का हौसला बढ़ाने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे हुए हैं। उनका कहना है कि भ्रष्ट व्यवस्था के कारण छात्र अपनी जान गंवाने को मजबूर हो रहे हैं। अब समय आ गया है कि पूरे सिस्टम में व्यापक बदलाव किया जाए।उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए कहा कि सरकार यह न समझे कि यह आंदोलन केवल छात्रों का है। इसमें देश के विभिन्न वर्गों का समर्थन शामिल है और लोग छात्र हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

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