रीवा। एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना क्लस्टर रीवा में कंसेशनायर एमएसडब्ल्यू होल्डिंग को करीब 43 करोड़ रुपए के कथित अतिरिक्त भुगतान का मामला सामने आया है। इस मामले में महापौर अजय मिश्रा ने ही आपत्ति दर्ज करवाई है। महापौर ने नगर निगम आयुक्त को लिखे पत्र में अनुबंध की शर्तों के विपरीत भुगतान, बिना सक्षम स्वीकृति टिपिंग फीस बढ़ाने तथा पहाडिय़ा स्थित प्लांट में प्रयागराज, बलिया, जौनपुर सहित अन्य क्षेत्रों और प्रदेशों से कचरा लाकर जलाए जाने के आरोप लगाए गए हैं। पूरे मामले की विस्तृत जांच और कार्रवाई के लिए कहा है।
कचरा प्रबंधन कंपनी पर शर्तों के उल्लंघन का आरोप पहले भी सामने आया है। अब नगर निगम के पूर्व कश्मिनर की भूमिका सवालों के घेरे में है, क्योंकि कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए कई ऐसे कार्य किए गए, जिसकी जानकारी मेयर इन काउंसिल और निगम परिषद तक को नहीं दी गई है। इस पूरे मामले में महापौर ने कहा है कि एक महीने के भीतर पूरे प्रकरण की जांच कराने के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करें। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि समय सीमा में जांच प्रक्रिया पूरी होकर रिपोर्ट नहीं आने की स्थिति में एमआईसी के जरिए लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को प्रकरण भेजा जाएगा। कचरा प्रबंधन में लगातार कमियों के बावजूद नगर निगम के अधिकारियों ने ठेका कंपनी को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया।
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40 प्रतिशत की जगह 100 प्रतिशत भुगतान का आरोप
महापौर ने कहा है कि अनुबंध में प्रावधान है कि एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधा स्थापित होने के एक वर्ष बाद 100 प्रतिशत भुगतान देय होगा। इसके बावजूद कंसेशनायर द्वारा वर्ष 2021 से ही 100 प्रतिशत की दर यानी 1746 रुपए प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से भुगतान लिया जा रहा है। जबकि अनुबंध के अनुसार उस समय 40 प्रतिशत की दर यानी 698.40 रुपए प्रति मीट्रिक टन से भुगतान होना था। वर्ष 2021 से 2025 के बीच करीब 4.10 लाख मीट्रिक टन कचरे पर इस आधार पर लगभग 42 करोड़ 95 लाख 16 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है। नगर निगम की ओर से किए गए इस भुगतान में अनियमितता का मामला होने की आशंका जाहिर की गई है।
– दूसरे राज्यों कचरा प्लांट लाया जा रहा
कचरा प्रबंधन कंपनी पर यह भी आरोप है कि पहडिय़ा स्थित प्लांट में शहर के कचरे का निस्तारण नहीं हो रहा है और कचरे का पहाड़ बन गया है, जिससे ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में अनुबंध के विपरीत प्रयागराज, बलिया, जौनपुर सहित अन्य प्रदेशों का कचरा लाकर जलाए जाने का मामला सामने आया है। इससे कंपनी को अतिरिक्त आय हो रही है और प्लांट की क्षमता समय पूर्व समाप्त की जा रही है। बता दें कि प्रयागराज के महाकुंभ का पूरा कचरा भी यहीं लाया गया था। जबकि यह क्लस्टर प्रोजेक्ट संभाग के 28 नगरीय निकायों के कचरा प्रबंधन के लिए है।
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टिपिंग फीस 1746 से बढ़ाकर 2747 रुपए प्रति टन
मामले में टिपिंग फीस बढ़ाने को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में आरोप है कि तत्कालीन आयुक्त डॉ. सौरभ सोनवणे द्वारा मेयर-इन-कौंसिल अथवा शासन से सक्षम स्वीकृति प्राप्त किए बिना टिपिंग फीस 1746 रुपए प्रति मीट्रिक टन से बढ़ाकर 2747 रुपए प्रति मीट्रिक टन कर दी गई। इसके लिए मॉनिटरिंग कमेटी की 31 जुलाई 2025 को हुई बैठक के प्रस्ताव में इंडिपेंडेंट इंजीनियर की टीप को आधार बनाया गया। कार्यालय के किसी अधिकारी की अनुशंसा है या नहीं, इसका कोई उल्लेख नहीं है। इसके बाद दर वृद्धि को पूर्व की तारीख 1 अप्रेल 2025 से लागू करने संबंधी पत्र 7 सितंबर 2025 जारी किया गया। आरोप है कि इसकी प्रति महापौर को इसलिए नहीं दी गई ताकि उन्हें इसकी जानकारी न हो सके।
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पत्र मिला है, जिसमें कुछ बिंदुओं पर आपत्तिया आई हैं। उसका परीक्षण करेंगे और नियमानुसार जो भी प्रक्रिया हुई है उसके आधार पर जवाब प्रस्तुत करेंगे। पहले के प्रकरण की जानकारी नहीं है, इसलिए अभी कुछ कहना उचित नहीं है।
अक्षत जैन, आयुक्त नगर निगम





