Friday, August 28

रीवा। मध्यप्रदेश के उपमख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के गृह शहर रीवा में गांधी मेमोरियल अस्पताल (जीएमएच) में प्रसव के दौरान जच्चा और नवजात की मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही, समय पर उपचार नहीं मिलने और नर्सिंग स्टाफ के अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए अस्पताल के मुख्य गेट पर धरना दिया। मामले के तूल पकड़ने पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने दो नर्सिंग ऑफिसरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जांच समिति गठित कर दी है।

बैकुंठपुर क्षेत्र के हटवा गांव निवासी कल्पना मिश्रा को 25 अगस्त की रात प्रसव के लिए जीएमएच में भर्ती कराया गया था। 26 अगस्त की रात प्रसव के दौरान महिला और नवजात दोनों की मौत हो गई। गुरुवार सुबह मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने समय रहते उचित इलाज नहीं किया। उनका कहना है कि डॉक्टरों के कहने पर बाहर से ब्लड मंगवाकर बिना पर्याप्त जांच के चढ़ाया गया, जिसके बाद कल्पना की तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। साथ ही भर्ती के दौरान दवाइयां और किट बाहर से मंगाने तथा स्टाफ द्वारा अभद्र व्यवहार करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने मरीज की गंभीर स्थिति पर ध्यान नहीं दिया और इलाज पीजी छात्रों के भरोसे छोड़ दिया। कुछ कर्मचारियों पर पैसे मांगने और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।

विधायक पहुंचे, दो घंटे चली बैठक

हंगामे की सूचना मिलने पर मनगवां विधायक नरेंद्र प्रजापति अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे तक बैठक हुई। बैठक के बाद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने प्रथम दृष्टया नर्सिंग ऑफिसर साधना वर्मा और सोनाली मुजाल्दे को निलंबित करने के आदेश जारी किए।

जिला अस्पताल की टीम ने किया पोस्टमार्टम

परिजनों ने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद जिला अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई और शव परिजनों को सौंप दिया गया।

विभागाध्यक्षों की जांच समिति गठित

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए विभागाध्यक्षों की समिति बनाई है। समिति में नेत्र रोग विभाग की डॉ. शशि जैन, सर्जरी विभाग के डॉ. प्रियंक शर्मा, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अवतार सिंह और गायनी विभाग की डॉ. पद्मा शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल किया गया है। समिति इलाज में लापरवाही, स्टाफ के व्यवहार और अन्य आरोपों की जांच करेगी।

मौत से पहले का वीडियो वायरल

घटना के बाद प्रसूता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में महिला ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकलकर चिल्लाते हुए कह रही है कि उसे बचाया जाए। परिजनों का दावा है कि यह वीडियो उसकी मौत से कुछ समय पहले का है। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कई बार मरीज का रक्तचाप बढ़ने पर उसका व्यवहार असामान्य हो सकता है।

क्या बोले जिम्मेदार

मनगवां विधायक नरेंद्र प्रजापति ने कहा कि परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार व इलाज में लापरवाही की शिकायत की है। सभी बिंदुओं की जांच के लिए समिति बनाई गई है और जांच में तथ्य सामने आने के बाद कार्रवाई होगी।

एसएस मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा कि परिजनों की शिकायत के आधार पर जांच समिति गठित कर दी गई है। प्रथम दृष्टया दो नर्सिंग ऑफिसरों को निलंबित किया गया है। उपचार में लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी और उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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