रीवा। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र से भटककर आए हाथियों में एक की मौत करंट से हुई है। जिसका पोस्टमार्टम कई विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने किया। इस दौरान वन्य प्राणियों से जुड़े प्रोटोकाल के अनुसार प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान रीवा, सीधी, मऊगंज, संजय टाइगर रिजर्व और बांधवगढ़ नेशनल पार्क के अधिकारी भी मौजूद रहे।
मऊगंज जिले के मलकपुर गांव में करंट से हुई मौत मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है। इस क्षेत्र का वन मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड रीवा-सीधी परियोजना मंडल सीधी के अधीन आता है। बीट सीतापुर की सीमा से लगभग 100 मीटर दूर ग्राम मलकपुर के कठौतिया टोला में नॉन कालर आईडी वाले हाथी की मौत हुई थी। पोस्टमार्टम में प्रथम दृष्टया करंट से ही मौत को माना गया है। पोस्टमार्टम के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की प्रचलित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार घटना स्थल से कुछ दूर पर हाथी को दफनाया गया।
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मकना हाथी था तो लोग हाथिनी मान रहे थे
करीब छह महीने से अधिक समय से मऊगंज, रीवा, सीधी जिले की सीमा से लगे जंगली क्षेत्र में दो हाथियों का मूवमेंट रहा है। इसमें जिस हाथी की करंट लगने से मौत हुई है, वह मनका हाथी था। उसके दांत बाहर नहीं थे, जिसकी वजह से लोग उसे हथिनी मान रहे थे। यहां तक की वन विभाग के अधिकारी भी शुरुआती दिनों में उसे हथिनी मान रहे थे और यहां तक की प्रेग्नेंट होने की आशंका की वजह से रेस्क्यू के लिए विशेषज्ञों को भी बुलाया गया था। अब मौत के बाद एक बार फिर विभाग ने आधिकारिक रूप से बताया है कि वह मकना नर हाथी था, जिसके दांत बाहर नहीं निकले थे।
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रेस्क्यू के लिए एक्सपर्ट हाथी मंगाए गए
करंट से हाथी की मौत के बाद उसके दूसरे साथी को अब जंगल से रेस्क्यू किया जाएगा। इसके लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से दो एक्सपर्ट हाथी मंगाए गए हैं, दोपहर बाद मलकपुर क्षेत्र में रेस्क्यू टीम के साथ दोनों हाथी पहुंच चुके हैं। इसी तरह संजय टाइगर रिजर्व सीधी से भी दो एक्सपर्ट हाथियों के साथ वहां की टीम सोमवार की सुबह पहुंचेगी और हाथी की घेराबंदी कर पकड़ा जाएगा। मलकपुर में घटना स्थल करीब दस किलोमीटर दूर उसका लोकशन मिला है, जहां पर निगरानी टीम लगी हुई है। हाथी के रेस्क्यू के लिए करीब सौ से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को बुलाया गया है।
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दूसरा हाथी नजदीक तक पहुंचा तो घर कराया खाली
एक हाथी की मौत पर दूसरा घटना स्थल पर शनिवार की रात पहुंच गया था। साथी की मौत के बाद उसके आक्रामक होने की आशंका बढ़ गई थी। इस कारण वन विभाग के अधिकारियों ने घटना स्थल के मकान में रहने वाले लोगों को वहां से निकाला और सुरक्षित जगह पर भेजा गया। रातभर वह अपने साथी के पास ही रहा, सुबह पहले उसे दूर किया गया, इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की गई। कुछ एक्सपर्ट के साथ निगरानी टीम भी उसे दूर करने में दिन भर जुटी रही। घटना स्थल से करीब दस किलोमीटर दूर वह जंगल में चला गया। माना जा रहा है कि वह अपने साथी को तलाशते हुए फिर घटना स्थल के आसपास ही आएगा, इसलिए वहीं पर रेस्क्यू किए जाने की भी तैयारी है।
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करंट से मृत हाथी का विशेषज्ञों की टीम ने पोस्टमार्टम किया है और निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया है। बचे हुए दूसरे हाथी के रेस्क्यू के लिए बांधवगढ़ और संजय टाइगर रिजर्व की टीमें आई हैं। पूरी सतर्कता के साथ रेस्क्यू आपरेशन पूरा किया जाएगा।
लोकेश निरापुरे, डीएफओ रीवा





