Monday, October 19

सीधी। स्वास्थ्य विभाग में संलग्नीकरण समाप्त करने और चिकित्सकों की प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति को लेकर विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। प्रमुख सचिव के निर्देश पर क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं रीवा संभाग ने सभी जिलों के सीएमएचओ को संलग्नीकरण समाप्त कर एक सप्ताह के भीतर प्रगति प्रतिवेदन देने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी सीधी जिले से रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। दूसरी ओर, सिहावल के प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. रिकेश शर्मा की नियुक्ति को लेकर कमिश्नर के निर्देशों पर अमल नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है।

स्वास्थ्य विभाग में संलग्नीकरण के जरिए कर्मचारियों को मूल पदस्थापना से अलग दूसरे कार्यालयों में सेवाएं देने का मामला लंबे समय से चर्चा में है। जारी निर्देशों के तहत दूसरे विभागों से स्वास्थ्य विभाग में आए कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में भेजने और स्वास्थ्य विभाग के ऐसे कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है, जो अन्य विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। इसका उद्देश्य मूल पदस्थापना के अनुसार कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

पीजी डॉक्टर को बीएमओ का प्रभार देने पर आपत्ति

सिहावल बीएमओ डॉ. रिकेश शर्मा की नियुक्ति को लेकर चुरहट क्षेत्र के निवासी एलबी सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बबीता खरे ने 11 मार्च 2026 को डॉ. शर्मा को सिहावल बीएमओ का प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया था। शिकायतकर्ता ने इसे पीजी चिकित्सा अधिकारियों से प्रशासनिक कार्य नहीं लेने संबंधी विभागीय निर्देशों के विपरीत बताया।

शिकायत में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त तरुण राठी के 14 अगस्त 2025 के निर्देशों का हवाला दिया गया था। इसके बाद रीवा संभाग के कमिश्नर सुदेश कुमार मालवीय ने 26 मार्च 2026 को क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं रीवा संभाग को नियुक्ति संबंधी आदेश निरस्त कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता का दावा है कि इसके बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि, इस संबंध में विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई की अद्यतन स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

सोनोग्राफी शुल्क को लेकर भी शिकायत

डॉ. शर्मा पर सोनोग्राफी जांच के नाम पर 500 रुपए तक शुल्क लेने के आरोप भी शिकायतकर्ता ने लगाए हैं। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, यह मुद्दा पहले भी अधिकारियों के समक्ष उठाया जा चुका है। हाल ही में सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक की मौजूदगी में हुई बैठक में भी इस विषय पर चर्चा होने का दावा किया गया है।

हालांकि, सोनोग्राफी शुल्क संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में विभागीय जांच के निष्कर्ष और संबंधित चिकित्सक का पक्ष सामने आना बाकी है।

कार्रवाई और जवाबदेही पर सवाल

संलग्नीकरण समाप्त करने के निर्देशों के बावजूद प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं होने के आरोप और बीएमओ की नियुक्ति पर कमिश्नर के निर्देशों के पालन को लेकर उठे सवालों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर ध्यान खींचा है। अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि सीधी जिले में संलग्नीकरण समाप्त करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और डॉ. शर्मा की नियुक्ति के संबंध में कमिश्नर के निर्देशों पर क्या कार्रवाई की गई।

मामले में स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही निर्देशों के पालन और लंबित कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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