रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय एवं नियुक्ति अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों की जांच की मांग को लेकर एनएसयूआई का आंदोलन सोमवार को टकराव में बदल गया। विश्वविद्यालय गेट के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, धरना और सत्याग्रह शुरू करने पहुंचे एनएसयूआई जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय समेत कार्यकर्ताओं को पुलिस-प्रशासन ने हटा दिया। आंदोलनकारियों द्वारा लगाया गया टेंट भी पुलिस ने उखाड़ दिया। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच नोकझोंक हुई तथा पंकज उपाध्याय समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बिछिया थाने ले जाया गया।
पंकज उपाध्याय का आरोप है कि टेंट हटाए जाने के बाद वह गांधी प्रतिमा लेकर अकेले शांतिपूर्वक बैठे थे, लेकिन पुलिस ने वहां भी बैठने की अनुमति नहीं दी और बल प्रयोग करते हुए उन्हें हटाया गया। बाद में साथियों समेत थाने ले जाया गया। कार्यकर्ताओं ने कई घंटे थाने में बैठाए रखने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने बताया अनुचित कार्रवाई
एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की हिरासत की सूचना पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा, प्रदेश महासचिव गुरमीत सिंह मंगू, पार्षद मनीष नामदेव, ब्लॉक अध्यक्ष रामकीर्ति शर्मा समेत अन्य नेता बिछिया थाने पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कहा कि छात्रों की मांगों पर सुनवाई करने के बजाय बल प्रयोग किया जाना उचित नहीं है।
तीन दिन में कार्रवाई नहीं तो जल सत्याग्रह
पंकज उपाध्याय ने कहा कि तीन दिन के भीतर विश्वविद्यालय से जुड़ी शिकायतों पर निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने जल सत्याग्रह की चेतावनी भी दी।
कुछ कार्यकर्ताओं ने संगठन से अलग होने का दावा किया
इधर, मानवेन्द्र, अभिराज, राजवीर और पुष्पेन्द्र सहित कुछ कार्यकर्ताओं ने एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा भेजने का दावा किया है। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय के मुद्दे पर चल रहा प्रदर्शन दबाव की राजनीति में बदल गया है। हालांकि, इन कार्यकर्ताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई तथ्यात्मक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं।





