इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांगजन को निर्धारित पेंशन राशि नहीं दिए जाने के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब महिलाओं को लाड़ली बहना योजना के तहत 1500 रुपए दिए जा रहे हैं, तो दिव्यांगों को नियमानुसार 1875 रुपए पेंशन क्यों नहीं दी जा रही।
यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से कोर्ट के समक्ष आया। याचिकाकर्ता पंकज मारू की ओर से अधिवक्ता मनीष विजयवर्गीय ने पक्ष रखा। याचिका में बताया गया कि वर्ष 2023 में भी इस संबंध में याचिका दायर की गई थी, जिसमें कोर्ट ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत पेंशन देने के निर्देश दिए थे।
याचिका में तर्क दिया गया कि अधिनियम की धारा-24 के अनुसार, राज्य सरकार को अन्य योजनाओं की तुलना में दिव्यांगों को 25 प्रतिशत अधिक पेंशन देना अनिवार्य है। ऐसे में यदि महिलाओं को 1500 रुपए दिए जा रहे हैं, तो दिव्यांगों को 1875 रुपए मिलना चाहिए। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्तमान में दिव्यांगजन को केवल 600 रुपए पेंशन दी जा रही है, जो नियमों के विपरीत है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ में हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 मई 2026 को होगी।
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