Dalai Lama Epstein Files:
जेफ्री एप्सटीन से जुड़े दस्तावेज़ों में दलाई लामा का नाम आने को लेकर सामने आई खबरों पर दलाई लामा के कार्यालय ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि परम पावन दलाई लामा का जेफ्री एप्सटीन से कभी कोई व्यक्तिगत संपर्क नहीं रहा और न ही किसी प्रकार की मुलाकात या संवाद की अनुमति दी गई थी।
दलाई लामा कार्यालय ने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में तथाकथित “एप्सटीन फाइल्स” का हवाला देकर दलाई लामा को इस विवाद से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जो पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है। बयान में यह भी कहा गया कि कुछ मीडिया संस्थान, विशेष रूप से चीन सरकार से जुड़े मंच, यह दावा कर रहे हैं कि इन दस्तावेज़ों में दलाई लामा का नाम 169 बार दर्ज है।
इस पूरे मामले पर तिब्बत राइट्स कलेक्टिव नामक शोध एवं नीति समूह ने भी स्थिति साफ की है। संगठन ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि दलाई लामा से संबंधित किसी भी दस्तावेज़ में न तो किसी गैरकानूनी गतिविधि का प्रमाण है और न ही किसी प्रकार के वित्तीय लेन-देन या व्यक्तिगत संबंध का संकेत मिलता है। अधिकांश उल्लेख सार्वजनिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक पहलों या तीसरे पक्ष की चर्चाओं से जुड़े हैं, जिनका उपयोग एप्सटीन या उसके सहयोगियों ने अपनी छवि या प्रभाव बढ़ाने के लिए किया था।
संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि किसी व्यक्ति का नाम किसी ईमेल या दस्तावेज़ में आ जाना, उस व्यक्ति की संलिप्तता या समर्थन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। एप्सटीन फाइल्स में राजनीति, शिक्षा, परोपकार और नागरिक समाज से जुड़े कई प्रमुख लोगों के नाम दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश पर किसी भी प्रकार का अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।
दलाई लामा के कार्यालय ने इस विवाद के समय को लेकर भी सवाल उठाए हैं। बयान में संकेत दिया गया है कि यह मुद्दा ऐसे वक्त पर उछाला जा रहा है, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दलाई लामा की गतिविधियों और उन्हें मिल रहे सम्मानों पर ध्यान बढ़ा है—और इस पर चीन की ओर से पहले भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।





