रीवा। शिक्षा विभाग में विसंगतियों को रोक पाने में असफल रहे प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रामराज मिश्रा के विरुद्ध कलेक्टर ने निलंबन का प्रस्ताव संभागायुक्त के पास भेजा है। यह फाइल करीब महीने भर से कमिश्नरी में दबी हुई है, अब तक संभागायुक्त की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसके पहले कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के आफिस में स्वयं दबिश देकर कई फाइलें जब्त कराई थी और उनकी जांच के बाद डीईओ के विरुद्ध कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा था।
यह मामला अब तक पूरी तरह से गोपनीय बना रहा लेकिन कलेक्टर के स्थानांतरण के बाद 13 मार्च को भेजे गए प्रस्ताव का पत्र सामने आया है। कलेक्टर के प्रस्ताव पर कार्रवाई में हो रही लेटलतीफी के चलते सवाल भी उठाए जाने लगे हैं। जिन आरोपों के साथ डीईओ के निलंबन का प्रस्ताव कलेक्टर ने भेजा है। उसके एक बिन्दु से जुड़े मामले में संभागायुक्त पहले कई कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई कर चुके हैं। डीईओ से जुड़ी फाइल दबी होने की वजह से इस मामले में संभागायुक्त से भी कार्रवाई में हो रही देरी का कारण जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनकी ओर से प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
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इन आरोपों के चलते कार्रवाई की अनुशंसा
– आरोप-1
कलेक्टर द्वारा 17 फरवरी 2026 को बोर्ड परीक्षा के निरीक्षण में बैकुंठपुर में एक ही बेंच पर दो परीक्षार्थी बैठाए हुए पाए गए। जिससे यह माना गया कि डीईओ परीक्षा की निगरानी ठीक से नहीं कर रहे हैं।
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आरोप-2
कलेक्टर ने 19 फरवरी 2026 को डीईओ कार्यालय का निरीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं पाई। स्कूटी खरीदी की राशि छात्राओं को नहीं देने, 36 असफल भुगतान पर कार्रवाई नहीं, नस्तियों का ठीक से संधारण नहीं, अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान में विलंब, कार्यालय से अधिकांश कर्मचारी गायब होने आदि से माना गया उनका कार्यालय में नियंत्रण नहीं है।
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आरोप-3
जिले के पैपखरा, खैरा, गुढ़, खटखरी, बढ़ैया एवं दुआरी स्कूलों में अनुरक्षण मद में नियमों की अनदेखी कर ठेकेदारों को मनमानी भुगतान। इसमें 13.97 लाख का घपला पाया गया। डीईओ की स्वीकृति के बाद भुगतान हुआ, इसलिए उनकी भूमिका भी इसमें मानी गई।
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अनुरक्षण घोटाले में दो निलंबित हो चुके
विद्यालयों में मरम्मत के लिए अनुरक्षण मद में आई राशि में घपला करने के मामले में संभागायुक्त की ओर से कई अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। तत्कालीन प्रभारी एपीसी सुधाकर तिवारी तथा प्राचार्य शासकीय उमावि गुढ़ विनय मिश्र को निलंबित किया जा चुका है। इसी मामले में कलेक्टर ने डीईओ को भी दोषी माना है लेकिन संभागायुक्त ने अब तक कार्रवाई नहीं की है। पूर्व में हुई जांच में कहा गया था कि हायर सेकंडरी स्कूल पैपखरा को 4.30 लाख, हाईस्कूल दुआरी को 4.82 लाख, पीएम श्री विद्यालय गुढ़ को 4.83 लाख, हायर सेकंडरी स्कूल खैरा को 4.75 लाख, हाईस्कूल बरहैया को 4.83 लाख एवं कन्या हाईस्कूल खटखरी को 4.83 लाख रुपए का भुगतान हुआ था। सभी स्कूलों में 28.38 लाख रुपए के भुगतान का सत्यापन कराए जाने के बाद अनियमितता सामने आई थी।
ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी को किए गए भुगतान पर सवाल उठाए गए थे। इसमें संभागायुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी रामराज प्रसाद मिश्रा, एडीपीसी रमसा नवीन श्रीवास्तव, एपीसी सुधाकर तिवारी, प्राचार्य गुढ़ विनय मिश्रा, प्राचार्य खैरा लक्ष्मीकांत मिश्रा एवं तत्कालीन लेखा अधिकारी पुष्पा पुशाम आदि को नोटिस जारी किया था। पैपखरा, खटखरी और बरहैया के प्राचार्यों ने पहले ही लिखकर दे दिया था कि उनके यहां कोई कार्य नहीं हुआ है। नए सिरे से मरम्मत कार्य की मांग भी उठाई थी। इसलिए नोटिस में उन्होंने अपना पक्ष रखा तो कार्रवाई से बच गए। वहीं कलेक्टर ने डीईओ पर कार्रवाई का प्रस्ताव ही भेजा दिया।





