Saturday, February 7

रीवा। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कॉर्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने एक बार फिर क्रिटिकल केस में प्रक्रिया सफल की है। क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से पीडि़त मरीज में हृदय की कोरोनरी एंजियोग्राफी तथा एंजियोप्लास्टी को अल्ट्रा-लो कॉन्ट्रास्ट तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

मरीज को पूर्व में हार्ट अटैक हो चुका था और वह हार्ट अटैक के बाद बार-बार सीने में दर्द की समस्या(पोस्ट-एमआई एंजाइना) से पीडि़त था। जांच में हृदय की प्रमुख धमनी एलएडी में गंभीर ब्लॉकेज पाया गया। इस संपूर्ण प्रक्रिया में मात्र 9 मिलीलीटर कॉन्ट्रास्ट डाई का उपयोग किया गया, जो कि किडनी रोगियों के लिए अत्यंत सुरक्षित माना जाता है और यह एक महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि है।

सामान्यत: हार्ट एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाओं में 80 से 120 मिलीलीटर कॉन्ट्रास्ट की आवश्यकता होती है, किंतु इस मामले में अत्यंत कम डाई में सफल उपचार किया गया। अस्पताल के डाक्टर्स ने बताया कि यह ऐसा केस था जिसमें मरीज के किडनी की समस्या बढ़ सकती थी। इस कारण उसके हार्ट के उपचार में किडनी की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना पड़ा। इस प्रोसीजर में कॉर्डियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. वीडी त्रिपाठी के साथ सहायक प्राध्यापक डॉ. सुरेन्द्र तिवारी और कैथ लैब नर्सिंग स्टाफ, टेक्नीशियन, पैरामेडिकल टीम तथा सहायक कर्मचारियों की टीम शामिल रही।
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आयुष्मान के चलते नि:शुल्क उपचार मिला
क्रॉनिक किडनी डिजीज से जुड़े केस में कार्डियक की समस्या से उपचार प्रक्रिया जटिल मानी जाती है। मरीज की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि किसी प्राइवेट अस्पताल में उपचार करा पाते। आयुष्मान कार्ड उनके पास होने की वजह से चिकित्सकों ने नि:शुल्क उपचार किया। इस योजना के तहत पहले भी सरकारी अस्पताल में कई जटिल समस्याओं का समाधान मरीजों को मिला है।
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मरीज को पहले अटैक आ चुका था। हार्ट के साथ ही किडनी से जुड़ी समस्या भी थी, ऐसे में सावधानी जरूरी थी। अल्ट्रा-लो कांट्रास्ट तकनीक का प्रयोग कर एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया पूरी की गई है। मरीज अब स्वस्थ हैं।
डॉ. वीडी त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी

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