रीवा। मऊगंज के पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के नेताओं पर गंभीर आरोप भी लगाए और कहा कि आगे जन आंदोलन जारी रहेगा। कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद किस पार्टी में जाएंगे, इसका भी खुलासा उन्होंने नहीं किया। प्रेस कांफ्रेंस कर इस्तीफे की जानकारी देते हुए लक्ष्मण ने कहा कि दो अप्रेल 2024 को कांग्रेस पार्टी की सदस्यता लिया था, इसके बाद से पार्टी के भीतर उपेक्षा का भाव बढ़ता गया। कई बार वरिष्ठ नेताओं को भी बताने का प्रयास किया लेकिन स्थानीय स्तर से लेकर ऊपर तक सब एक जैसे हैं।
तिवारी ने आरोप लगाया कि वह मऊगंज से विधायक रहे हैं, वहां बड़ी संख्या में समर्थक हैं। क्षेत्र में पार्टी के कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जाता था। कई बार खुद कार्यक्रम का प्रयास किया तो उसमें बाधा उत्पन्न की गई। इस्तीफा देते समय प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ ही रीवा और मऊगंज इकाई के नेताओं पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
पार्टी पर गंभीर आरोप लगाकर इस्तीफा देने वाले लक्ष्मण तिवारी को सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया जा रहा है। वह लगातार कई पार्टियां बदलते रहे हैं। इस बार फिर उन्होंने जातीय रंग देने का प्रयास किया। ब्राह्मण अस्मिता की बात कही है, इसके पहले सिरमौर से चुनाव हार ने पर ब्राह्मणों को ही सबसे अधिक अपशब्द बोल रहे थे। पूर्व में मऊगंज से हारने पर अपनी ही जाति के लोगों पर भड़ास निकाला था, अब फिर से जातीय हवा देने के प्रयास में हैं।
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पार्टी नेता को जानवर कहा था
कुछ दिन पहले ही लक्ष्मण तिवारी ने मऊगंज जिले में एक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें कांग्रेस पार्टी के लोग नहीं पहुंचे तो उनका गुस्सा सामने आया। भरे मंच से उन्होंने कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना के लिए कहा कि यहां बन्ना कांग्रेस चलती है, मैं जानता की वह कौन सा जानवर है लेकिन यदि मैं रहा तो तिलक नहीं लगने दूंगा। खुले तौर पर इस तरह से वरिष्ठ नेता के बारे में कहने पर पार्टी ने नोटिस जारी की और कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद लक्ष्मण तिवारी ने खुद ही पार्टी से दूरी बना ली और इस्तीफा सौंप दिया।
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पहले भी कई पार्टियां छोड़ चुके
लक्ष्मण तिवारी ने सवर्ण समाज पार्टी से अपनी शुरुआत की थी, कई बार चुनाव लड़े पर हारते रहे। उमा भारती के साथ भारतीय जनशक्ति पार्टी में गए, मऊगंज से विधायक चुने गए। पार्टी का विलय हुआ तो भाजपा में चले गए। भाजपा के नेताओं से नहीं बनी तो फिर सवर्ण समाज पार्टी को खड़ा करने का प्रयास किया लेकिन तकनीकी कारणों से दूसरे दावेदार के आने से पार्टी उन्हें नहीं मिल पाई, इसलिए उसे भी छोड़ दिया। वर्ष 2023 में सिरमौर से समाजवादी पार्टी की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, 2065 वोट मिले और जमानत जब्त हुई तो ब्राह्मण समाज और क्षेत्रवासियों को अपशब्द भी कहे। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में आए लेकिन यहां भी पार्टी के साथ अधिक समय तक नहीं चल पाए और इस्तीफा सौंप दिया।
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चिंतन बैठक के जरिए भी दबाव बनाने का प्रयास
कुछ समय से कांग्रेस के भीतर असंतुष्ट ब्राह्मण समाज के नेताओं के साथ लक्ष्मण तिवारी चिंतन बैठकों का आयोजन कर रहे थे। रीवा से शुरू हुई यह बैठक संभाग के सभी जिलों में आयोजित हो चुकी है। इसमें कांग्रेस पार्टी के भीतर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा के आरोप लगाए जाते रहे हैं। साथ ही राज्यसभा सीट की मांग की जाती रही है। राज्यसभा के लिए लक्ष्मण तिवारी प्रमुख दावेदार थे लेकिन पार्टी ने इस तरह की बैठकों पर गंभीरता नहीं दिखाया, इसको लेकर भी लक्ष्मण के मन में नाराजगी बनी रही।





